श्यामा श्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है

श्यामा श्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है




श्यामा श्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है |

मोर मुकुट की लटक बसन्ती ,
चन्द्रकला की चटक बसन्ती ,
मुख मुरली की मटक बसन्ती |
सिर पै पेंच श्रवण कुंडल छविपान बसन्ती है ||1||

 माथे चन्दन लस्यो बसन्ती ,
कटि पीताम्बर कस्यो बसन्ती ,
मेरे मन मोहन बस्यो बसन्ती |
गुन्ज्माल गल सोहे ,फूलन हार बसन्ती है ||2||

कनक कडूला हस्त बसन्ती ,
चले चाल अलमस्त बसन्ती ,
पहिर रहे सब वस्त्र बसन्ती |
रुनक झुनक पग नूपुर की झंकार बसन्ती है ||3||

संग ग्वालन को टोल बसन्ती ,
बजै चंग ढफ ढोल बसन्ती ,
बोल रहे सब बोल बसन्ती |
सब सखियन में राधा जू सरदार बसन्ती है ||4||

परम प्रेम परसाद बसन्ती ,
लगै चसीलू स्वाद बसन्ती ,
ह्वै रही सब मर्याद बसन्ती |
घासीराम जुगल जोड़ी पर बलिहार बसन्ती है ||5||

''जय श्री राधे कृष्णा ''

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