मुख्यपृष्ठ नाच्यो बहुत गोपाल byरचनाकार •14 सितंबर 0 नाच्यो बहुत गोपाल अब मैंनाच्यो बहुत गोपाल |काम क्रोध को पहिर चोलनाकंठ विषय की माल ||1||तृष्णा नाद करत घट भीतरनाना विधि दे ताल ||2||भरम भयो मन भयो पखावजचलत कुसंगत चाल ||3||सूरदास की सबे अविद्यादूर करो नन्दलाल ||4||''जय श्री राधे कृष्णा '' Facebook Twitter