तर्ज- दूल्हे जा सेहरा सुहाना लगता है       



तर्ज- दूल्हे जा सेहरा सुहाना लगता है
                   
नवरातों में, नौ दिन तक माँ आयेगी
हर बच्चे पर, अपना प्यार लुटायेंगी
मात चरण में, नित्य नियम से, आ जाना
मन की मुरादें, माँ पूरी कर जायेगी |
                 
नवरातों में, माँ की किरपा, सबपे बरसती है
हर भगतों की, जीवन बगिया, खूब महकती है
सबके सिर पर माता हाथ फिरायेगी
ममता रूपी आँचल माँ लहरायेगी ||1||
                  
नवरातों में, नौ दिन तक दरबार लगाती है
नव रूपों में, नित्य नया माँ दरश दिखाती है
बल बुद्धि विद्या, माता दे जायेगी
हर बच्चें का, जग में मान बढ़ायेगी ||2||
                   
नवरातों की, पावन घड़ियाँ, जब जब आती है
तब तब सारी, सृष्टि जगती, धन्य हो जाती है
कहे "रवि" माँ, जग को स्वर्ग बनायेगी
अमन चैन और सुख की गँग बहायेगी ||3||
                   
रविन्द्र केजरीवाल "रवि" 






जै श्री राधे कृष्ण
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श्री कृष्णायसमर्पणं

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