Chod ke sare bandhan jag ke sawariya se preet laga le

छोड़ के सारे बन्धन जग के, सांवरिया से प्रीत लगा ले।
सांवरिया के गुण गा ले, मनवा सांवरिया के गुण गा ले॥

भुगत लिये सुख-दुख जग के, सभी अरमान निकाले।
अब भी समय है मूरख वन्दे, जी भर कर पछता ले॥

यहाँ सभी को मिलते धोखे, किन-किन से पड़ते पाले
सांवरिया के गुण गा ले, मनवा सांवरिया के गुण गा ले॥

जगत के सब आकर्षण नश्वर, सब हैं तेरे देखे भाले।
भटक रहा अब तक प्यारे, पग-पग मिले तुझे छाले॥

कर ले भक्ति प्रभु की अब, कृपा सांवरिया की तू पा ले।
सांवरिया के गुण गा ले, मनवा सांवरिया के गुण गा ले॥

श्री हरिदास

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