He kanha aap hi toh is deen ke adhar hai

He kanha aap hi toh is deen ke adhar hai

हे कान्हा आप ही तो, इस दीन के आधार हैं
टकटकी लगाये देखूँ , कँहा साँवले सरकार हैं ।

राह पलकों से बुहारू , कब पधारेंगे साँवरे प्रभु
भाव का आसन बिछाऊ , भक्ति का श्रीगार है ।।
धूल चरणों की प्रभु के , मस्तक पे मेरे धरूँ
गोविन्द ही के नाम से , दुनिया मेरी गुलज़ार है ।

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