Mohan ne lagaya adhro se

मोहन ने लगाया अधरों से
अधरामृत पिलाया अधरों से

नाजुक कर कमलो से उठा कर के
तुमको लगाया अधरों से

मुरली धन्य भाग्य तुम्हारे हुए
मोहन ने लगाया अधरों से

कोमल कर से वो उठाते हैं
तुम्हे अपने करीब हर समय बिठाते हैं

कभी अपने पास सुलाते हैं
कभी होंठो का रस तुम्हे पिलाते हैं

कभी बांध के अपनी कमरिया में
रसिया अपने साथ तुम्हे ले जाते हैं

मुरली धन्य भाग तुम्हारे हुए
मोहन ने लगाया अधरों से



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