प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो,समदरसी है नाम तुम्हारो, नाम





प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो,
समदरसी है नाम तुम्हारो, 
नाम की लाज करो |

एक नदी एक नाला कहाय, 
मैल हो नीर भरो |
गंगा में मिल कर दोनों, 
गंगा नाम परो ||1||

काँटे और कलियाँ दोनों से, 
मधुबन रहे भरो |
माली एक समान ही सीँचे, 
कर दे सबको हरो ||3||

''जय श्री राधे कृष्णा ''

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