अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो।




अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो ,
इस भव बंधन के भय से हमें उबारौ।

तुम कृपा सिंधु रघुनाथ नाथ हो मेरे ,
मैं अधम पड़ा हूँ चरण कमल पर तेरे,
हे नाथ। तनिक तो हमरी ओर निहारो ||1||

मैं पंगु दीन हौं हीन छीन हौं दाता ,
अब तुम्हें छोड़ कित जाउं तुम्हीं पितु माता ,
मैं गिर न कहीं प्रभु जाऊँ आय सम्हारो||2||

मन काम क्रोध मद लोभ मांहि है अटका ,
मम जीव आज लगि लाख योनि है भटका ,
अब आवागमन छुड़ाय नाथ मोहि तारो ||3||

''जय श्री राधे कृष्णा ''
 

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