ना स्वर हैं, ना सरगम हैं, ना लय न तराना है।



ना स्वर हैं, ना सरगम हैं, ना लय न तराना है।
बजरंग के चरणो में एक फूल चढ़ाना है॥

तुम बाल समय में प्रभु, सूरज को निगल डाले,
अभिमानी सुरपति के, सब दर्प मसल डाले,
बजरंग हुए तब से, संसार ने जाना है ||1||

जब राम नाम तुमने, पाया ना नगीने में,
तुम चीर दिए सीना,सिया राम थे सीने में,
विस्मित जग ने देखा ,कपि राम दीवाना हैं ||2||

सब दुर्ग ढ़हाकर के, लंका को जलाए तुम,
सीता की खबर लाये, लक्ष्मण को बचाये तुम,
प्रिय भरत सरिस तुमको, श्री राम ने माना है ||3||

हे अजर अमर स्वामी, तुम हो अन्तर्यामी,
हूँ दीन हीन चंचल, अभिमानी अज्ञानी,
यदि तुमने नज़र फेरी, फिर कहाँ ठिकाना है ||4||


''जय श्री राधे कृष्णा ''


Share your thoughts on Lord Krishna. Join the discussion! 🕉️💬🙏

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने