ऐसी लगन लगादे  श्याम , मैं तेरा बन जाऊं

ऐसी लगन लगादे श्याम , मैं तेरा बन जाऊं





धुन-ऐसी मस्ती कहाँ मिलेगी ऐसी लगन लगादे श्याम , मैं तेरा बन जाऊं इस दुनियाँ को भूल के श्याम , मैं तेरा गुण गाऊं | ये दुनियाँ तो है मतलब की , स्वार्थ के सब नाते , मुख पर हँसी सजाकर मिलते , पीछे हँसी उड़ाते , ऐसी दो तरफ़ा दुनियाँ से , मैं कैसे बच पाऊँ || १ || कौन है अपना कौन पराया , आज समझ नहीं आये , जिनको हम अपना कहते हैं , वो ही घाव लगाये , इस पीड़ा से मुझको बचालो , मैं ये अर्ज लगाऊं || २ || दास " रवि " ये कहता मुझको , अपनी शरण में ले लो , भटक रहा हूँ इस जीवन में , अपने द्वारे रखलो , इतनी किरपा तुम करदो तो , मैं भव से तर जाऊं || ३ || ''जय श्री राधे कृष्णा ''






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