ज्योत से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो




ज्योत से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो
राह में आये जो दिन दुखी, सबको गले से लगाते चलो

जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वो है प्रभु का प्यारा
प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो||1||

आशा टूटी ममता रूठी छुट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का देदो कुछ तो सहारा
दिए दया के जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो ||2||

छाया है चारों और अँधेरा, भटक गई है दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव, किसको व्यथा सुनाए
धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो||3||

''जय श्री राधे कृष्णा ''

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