
मेरे मन में है श्याम, मेरे तन में है श्याम ।
मेरे नैनो की नगरिया में श्याम है ॥
मेरे रोम रोम के है श्याम ही रमिया
साँसों के स्वामी, मेरी नैया के खिवैया।
कण कण में हैं श्याम, त्रिभुवन में हैं श्याम,
नीले नभ की अटरिया में श्याम है॥1||
जनम जनम का जिन से है नाता,
मन जिनके पल छिन गुण गाता।
गुण धुन में है श्याम, रन झुन में है श्याम,
सारे जग की डगरिया में श्याम है॥2||
जहाँ कहीं देखूं वहीं श्याम की है माया,
सब ही के साथ श्री श्याम जी की छाया ।
सुमिरन में है श्याम , दर्शन में है श्याम,
मेरे मन की मुरलिया में श्याम है॥3||
''जय श्री राधे कृष्णा ''
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