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कभी न भूलूँ श्याम को चाहे दुनियाँ मुझे भुलाये
अर्पण सब उस नाम को जो भव से पार लगाये |
सहज भाव से भजूँ हरि को तजूँ जगत से नेह
कोई अपना है नहीं सगी न अपनी देह
सब कुछ दिया है श्याम ने अब वो ही प्रीत जगाये ||1||
सच्चे तुम मेरे मीत हो तुम ही पालनहार
इस जग में है कुछ नहीं झूठे सब व्यवहार
चिरसंगी मेरा श्याम है वो ही साथ निभाये ||2||
तुम्ही मेरे दाता हो तुम्ही खिवैया और कहीं क्यूँ जाऊँ
चरणों में तुम्हारे ही मथुरा काशी मैं तुमको शीश झुकाऊं
तुम्हारे दर्शन पाकर मोहन मेरा जन्म मरण मिट जाये ||3||
''जय श्री राधे कृष्णा ''
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