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सुनो श्यामसुन्दर! क्षमा मांगता हूँ
हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ |
गलती के पुतले इंसान है हम,
भले है बुरे है तेरी संतान है हम
दया के हो सागर, मैं जानता हूँ ||1||
कश्ती को मेरी, साहिल नहीं है,
तुम्हारे चरण के हम काबिल नहीं है
काबिल बनाओगे ये मानता हूँ ||2||
भक्तो की गलती को दिल पे न लेना,
सजा जो भी चाहो श्याम हमें तुम देना
करुणानिधि हो तुम पहचानता हूँ ||3||
''जय श्री राधे कृष्णा ''
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