बाँकेबिहारी की बांकी मरोर

बाँकेबिहारी की बांकी मरोर



बाँकेबिहारी की बांकी मरोर
चित्त लीन्हा है चोर ।

बांका मुकुट बाँके कुंडल विशाल
गल हार हीरों का मोतियन की माल
बाँको ही पटका को लटका है छोर ।|1||


मुंदरी जड़ाऊँ जवाहरात की
बाँकी लकुटिया सजी हाथ बीच
बाँके पीताम्बर की झलके किनोर ।|2||

कमलों से कोमल हैं बाँके चरण
हे श्यामसुन्दर मनोहर बदन
भक्तों की प्रीत जैसे चंदा चकोर ।|3||

बांकी है झांकी और बांकी अदा
भक्तों के कारज संवारे सदा
हो जैसे दीनों की सुनते निहोर ।|4||


''जय श्री राधे कृष्णा ''


  

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