मैं देखू जिस ओर सखी री, सामने मेरे सावरीयां.....




मैं देखू जिस ओर सखी री,
सामने मेरे सावरीयां |

प्रेम ने जोगन मुझ को बनाया
तन को फूँका, मन को जलाया
प्रेम के दुख में डूब गया दिल जैसे जल में गागरीयां ||1||

रो रो कर हर दुख सहना हैं
दुख सह सह कर चूप रहना हैं
कैसे बताऊ, कैसे बिछड़ी पी के मुख से बासूरीयां ||2||

दुनियाँ कहती मुझ को दीवानी
कोई ना समझे प्रेम की बानी
साजन साजन रटते रटते, अब तो हो गयी बावरीयां ||3||

''जय श्री राधे कृष्णा ''

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