
तोड़-फोडक़र मुझे बाना लो, प्रभु ! अपने मनके अनुकूल।
रहने दो न किसी भी बाधक वस्तु-परिस्थितिको तुम भूल |
तुरंत छीन लो उस धनको, इज्जतको, जो बाधक हो अल्प।
कर दो ऐसा सारा सुख-विध्वंस, तुरंत करके संकल्प ||1||
मेरे मनमें उठे कभी यदि तनिक कहीं ऐसा अभिलाष।
जो बाधक हो इसमें, कर दो तुरंत, दयामय ! उसका नाश ||2||
करने मत दो, हाथ-पैर-मुख-मनको ऐसा कोई काम।
जिससे तनिक तुम्हारी अविरत स्मृतिमें आये क्षणिक विराम ||3||
''जय श्री राधे कृष्णा ''
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