नीको बन्यो गोकुल गाम सुहावनोजहाँ खेलत हरि होरी।इतही सकल व्रज

नीको बन्यो गोकुल गाम सुहावनोजहाँ खेलत हरि होरी।इतही सकल व्रज








नीको बन्यो गोकुल गाम सुहावनो
जहाँ खेलत हरि होरी।




इतही सकल व्रज के बालक उत झुंडन जुरि आई
तरुणी सब मिली तिनमें राधा गोरी ||1||




विविध भाँति बाजे बाजत
नव केसर अरगजा कुमकुम घोरी ||2||




रतनजटित पिचकाई कर गही छिरकत
तकि-तकि मुदित परस्पर नवल किशोर-किशोरी ||3||




इह विधि करि खेलत झेलत हैं
सिंधु तरंग भयी व्रजजन खोरी ||4||




मोही अमरवधू निरखत बरखत कुसुमन
'रघुवीर' फिरत संग बीरा भरि-भरि झोरी ||5||


जै श्री राधे कृष्ण

🌺
श्री कृष्णायसमर्पणं

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