सत्संगति से प्यार करना सीखो जी, जीवन का उद्धार करना सीखो जी








सत्संगति से प्यार करना सीखो जी, 

जीवन का उद्धार करना सीखो जी  |




यह जग मोहन नित्य का सपना ,

नहीं  कोई गैर नहीं कोई अपना,
सत्य असत्य विचार करना सीखो जी ||1||




हरी का भजन नित्य प्रति कीजे

अंतःकरण शुद्ध कर लीजै
प्रभु से साक्षात्कार करना सीखो जी ll3ll




भिक्षु कहे सुनो मन मेरो,

नर तन भव वारिधि बन मेरो,
अब भव से बेडा पार करना सीखो जी ll4ll










जय श्री राधे कृष्ण



       श्री कृष्णाय समर्पणम्

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