म्हारा प्रीतमा घर आवो जी।दरस बिना दुखे नैन मोरे आकरगरवा

म्हारा प्रीतमा घर आवो जी।दरस बिना दुखे नैन मोरे आकरगरवा



म्हारा प्रीतमा घर आवो जी।
दरस बिना दुखे नैन मोरे आकर
गरवा लगावो जी।



मैं तेरी दासी जन्म जन्म की,
गिरधर मैं तेरी कई जन्म की,
मोहे ना बिसरावो जी||1||



साज सिंगार कछु न भावे,
बिरहनी रोय रोय नीर बहावे
और देरी नाय लावो जी||2||



देह में प्राण काहे धरूँ मैं,
गिरधर तोसे मनुहार करूँ मैं,
काहे जिया जरावो जी।||3||














जै श्री राधे कृष्ण

🌺
श्री कृष्णायसमर्पणं

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