पानी में मीन प्यासी



पानी में मीन प्यासी ,
मोहे सुन सुन आवत हांसी |

आत्म ज्ञान बिना नर भटके ,
कोई मथुरा कोई कशी ||१||

जैसे मृग नाभि कस्तूरी
वन वन फिरत उदासी ||२||

जल विच कमल ,कमल विच कलियाँ ,
तां पर भंवर उदासी ||3||

सो मन वचन विलोक भयो सब ,
यति यति सन्यासी ||४||

जाको ध्यान धरे मुनिहरी हर
मुनिजन सहज उदासी ||५||

सो तेरे घर माहि विराजे ,
परम पुरुष अविनाशी ||६||

है हाजिर तोहे दूर दिखावे ,
दूर की बात निराशी ||७||

कहे कबीर सुनो भई साधो ,
गुरु बिन भ्र्म न जासी ||८||

''जय श्री राधे कृष्णा ''
      

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