
झूलत पालने गोविंदा।
ढम ढम ढम डमरू बजावत आये जोगी फिरिन्दा।
दरसन लाल को करनो है मैय्या यही धुनी रमिंदा।।1||
मेरो गुरु ने भेज्यो है,जिन हिमपरबत ध्यान करिन्दा।
बेर बेर द्वारे पे टेरत बाजत गावत नृत्यत थापमृदंगा।।2||
मेरो लाला अति कोमल नन्हो तू लपटाए सर्प भुजंगा।
डरप रह्यो हों मै अति बाढ़ी,मेरो छोटो बाल मुकुन्दा।।3||
माता तू अतिसय है भोरी,बालक तेरो जग सुखकंदा ।
लाला तुतरा बोल्यो मैय्या सों ये जोगी नाहि सुरिन्दा।।4||
आंचल महि लालन ढांपि लायी,दरसाई जोगिन्दा।
'स्यामदास' बिहारी बलिहारी हों,काटो भव को फंदा।।5||
''जय श्री राधे कृष्णा ''
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