नैनन में श्याम समाए गयो,

नैनन में श्याम समाए गयो,




नैनन में श्याम समाए गयो,
 मोहे प्रेम का रोगलगाए गयो ।|

लुट जाउंगी श्याम तेरी लटकनपे,
बिक जाउंगी लाल तेरी मटकन पे । 
मोरे कैल गरारे भाए गयो,
 मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो ॥1||

 मर जाउंगी काह्ना  तेरी अधरन पे,
मिट जाउंगी तेरे नैनन पे ।
वो तो तिरछी नज़र चलाए गयो,
 मोहे प्रेमका रोग लगाए गयो ॥2||

 बलिहारी कुंवर तेरी अलकन पे,
 तेरी बेसर की मोती छलकन पे|
 सपने में काह बताय  गायो,
 मोहे प्रेमका रोग लगाए गयो ॥3||

 पागल को प्यारो वो नंदलाला,
 दीवाना भाए है जाके सब ग्वाला ।
 वो तो मधुर मधुर मुस्काये गयो,
मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो ॥4||

''जय श्री राधे कृष्णा ''


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