कह देना उधो, इतनी सी बात हमारी,कठिन सौत कुब्जा के



कह देना उधो, इतनी सी बात हमारी,
कठिन सौत कुब्जा के बस में,
ज्यामें बसे मुरारी ।।

कह देना उस कमलनयन से, 
प्राण ले गया क्यूँ नहीं तन से,
जैसे पानी बरसे घन से,
वैसे आँसू झारी रे ||1||

मथुरा की ये महल-हवेली,
कुब्जा बन गई नई नवेली,
शहरी नार बड़ी अलबेली,
हमसे लगे जो प्यारी रे ||2||

ऐसा हमको क्यों पढ़ाया,
फूँक दई बिन अग्नि काया,
क्यूँ ना हमको जहर पिलाया,
भेजी क्यूँ ना कटारी रे ||3||

हम आयेंगे यमुना होकर,
तन-मन अपनी सुधबुध खोकर,
'तुलसी' बेशक़ से रो-रोकर,
कर दें यमुना खारी रे ||4||



जै श्री राधे कृष्ण


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श्री कृष्णायसमर्पणं



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