ना मैं मीरा ना मैं राधा   फिर भी श्याम को

ना मैं मीरा ना मैं राधा   फिर भी श्याम को










ना मैं मीरा ना मैं राधा 
  फिर भी श्याम को पाना है 
     पास हमारे कुछ भी नहीं 
        केवल भाव चढ़ाना है  |




जब से तेरी सुरत देखी 
  तुम में प्रेंम की  मूरत देखी 
     अपना तुम्हे बनाना है !
        बस अपना तुम्हे बनाना है ||1||




और किसी को क्या मैं जानु 
   अपनी लगन को सब कुछ जानु 
      दिल का दर्द सुनाना है !
        बस दिल का दर्द सुनाना हैं  ||2||




जन्मो से मैं अटकी मोहन 
  युग युग से मैं भटकी मोहन 
     अपना तुम्हे बनाना हैं 
        बस अपना तुम्हे बनाना हैं  ||3||


जै श्री राधे कृष्ण
🌺





श्री कृष्णायसमर्पणं

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