
नहीं पाऊँ चैन सखी
बिरह मेरो हिय जलावे
कोउ तो जावे श्याम सुंदर
सों सन्देस लावे|
रात दिन बाँवरी तेरी
श्याम श्याम रटत है
ऐसो पिया निष्ठुर भयो
हाय कब लौट आवे ||1||
बिरहों सो शूल मेरो
हिय चीर देत सखी
पीर ऐसो भारी होवे
सही नहीं जावे||2||
श्याम श्याम रटत ही
बाँवरी इत उत् डोलूं
वन वन खोजूं कब
श्याम मेरो आवे ||3||
पात पात पूछ्यो मैं
कोउ ना संदेसा मिल्यो
हाय सखी बिरह
पीर हिय को जलावे ||4||
ऐसो ताप बढ्यो सखी
जल जल मर जाऊँ
राख ढेर पड्यो रहे
जबहुं श्याम ना आवे ||5||
जै श्री राधे कृष्ण
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श्री कृष्णायसमर्पणं
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