हे गिरधर गोपाल लाल तू, आजा म्हारे आंगना माखन मिसरी



    
हे गिरधर गोपाल लाल तू, आजा म्हारे आंगना 

माखन मिसरी तुझे खिलाऊँ, और झुलाऊँ पालना





मैं अर्जी कर सकता हूँ, आगे मर्जी तेरी है, 
आना हो तो आ सांवरिया, फेर करे क्यूं देरी है! 
मुरली की तान सुना जा, चाल न टेढ़ी चालना ||1||





कंचन भर के थाल सजायो, खीर चुरमा बाटकी! 
दूध मलाई से मटकी भरी है, आजा जीमले ठाठकी! 
तेरी ही इच्छा के माफिक, खाना हो सो खाना||2||





गंगा जल से कलश भरा है, दतवन शीशा कंघा है! 
वस्त्र पहराऊँ रंग रंगीला, मन भावा और चंगा है! 
खेलने न मैं देऊँ खिलौना, आना हो तो आवना ||3||





धन्ना जाट ने तुझे पुकारा, रूखा ~सूखा खाया तू ,
करमा बाई लाई खीचड़ो, रूच~रूच भोज लगाया तू
मेरी बार क्यों रूठ के बैठा, भायी न मेरी भावना ||4||




जै श्री राधे कृष्ण
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श्री कृष्णायसमर्पणं



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